Book Essay In Hindi

संसार की उन्नति का कारण और परिणाम, दोनों पुस्तकें ही हैं। पुस्तकों के कारण संसार के एक कोने से दूसरे कोने तक जानकारी, ज्ञान और अनुभव का विस्तार हुआ। परिणामस्वरूप आज अत्यन्त दुर्लभ विषयों पर हर भाषा में किताबें उपलब्ध हैं। पुस्तकें उपलब्ध होना संसार की उन्नति के स्तर को दर्शाता है।

संसार की प्रत्येक पुस्तक को पढ़ना सम्भव नहीं है। मुझे पुस्तकें पढ़ने का शौक है। मैंने बहुत सी पुस्तकें पढ़ीं जिनमें से कुछ पुस्तकों से बहुत अधिक प्रभावित हुआ। विष्णु शर्मा की पंचतंत्र मुझे बहुत प्रिय है।

महाभारत और रामायण ने भी मेरे जीवन पर गहरा असर डाला। तुलसीदास जी की रामचरितमानस पर आधारित ‘बाल रामायण’ को मैं पुस्तकों में सर्वोत्तम स्थान देता हूँ, क्योंकि मैं इसे अपने द्वारा पढ़ी पुस्तकों में सर्वश्रेष्ठ और आदर्श पुस्तक मानता हूं।

‘बाल रामायण’ की कथा श्री राम की जीवन कथा है। इसकी भाषा बहुत सरल एवं कथानक बहुत गठा हुआ है।

श्री राम के बचपन से लेकर राम राज्य तक का जीवन वृत्तान्त हर पल कोई संदेश देता हुआ लगता है। श्री राम की जीवन हर पृष्ठ पर एक रिश्ते का आदर्श रूप प्रस्तुत करता है। बालक और पिता, बालक और माँ, बालक और गुरू, राम किस रूप में खरे नहीं उतरे? राम एक आज्ञाकारी पुत्र, स्नेही भ्राता और आदर्श पति थे। राम राज्य को तो लोग आज भी याद करते हैं।

राम एक अच्छे मित्र, एक अच्छे स्वामी, अच्छे योद्धा और एक अच्छे राजनीतिझ  भी थे। रामायण के पढ़ने से मानव को धर्म और नीति दोनों का ज्ञान होता है। मेरी यह प्रिय पुस्तक जहाँ ज्ञान और व्यवहार कौशल में वृद्धि करती है वहीं आदि से अन्त तक मनोरंजन का खजाना भी है। यही इसे अन्य पुस्तकों में विशिष्ट और महत्वपूर्ण बनाता है।

मेरी प्रिय पुस्तक

पुस्तक का मनुष्य के जीवन में विशेष महत्त्व होता है | ये उसकी सच्ची साथी व् मित्र होती है | उसके अच्छे व बुरे समय में उसका साथ देती है | उसकी प्रत्येक समस्या का निवारण इनकी सहायता से किया जा सकता है | परन्तु हमे अच्छी पुस्तको का ही अध्ययन करना चाहिए | मन को स्वस्थ व प्रसन्न रखने के लिए अच्छी पुस्तको का अध्ययन आवश्यक है | अच्छी पुस्तको के ज्ञान से मानव की मानसिक व बौद्धिक शक्तियों का विकास होता है | मैंने भी अपने ज्ञान में वृद्धि करने व अपनी ज्ञान – पिपासा को शांत करने के लिए अनेको पुस्तको का अध्ययन किया है परन्तु उन सबमे से मुझे तुलसीकृत रामचरितमानस अर्थात रामायण ने मुझे अधिक प्रभावित किया है | यह ही मेरी प्रिय पुस्तक है |

मेरी प्रिय पुस्तक रामचरितमानस में वे गुण विद्दमान है जो एक श्रेष्ठ पुस्तक में होने चाहिएँ | इस महाकाव्य के नायक श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम है | ये जीवन के सभी क्षेत्रो में त्याग, दया, परोपकार, शौर्य , धैर्य , सहानुभूति , जनरक्षक , कृपालु आदि अनेक गुणों के परिचायक है | इसके रचना का शुभारम्भ संवत 1631 की मार्ग शीर्ष की शुक्ला पंचमी को रविवार  के दिन मानी जाती है तथा इसका रचना स्थान अयोध्या व् काशी है | इसकी भाषा अवधी है | यह एक महाकाव्य है जिसमे दोहे और चौपाई छंदों का प्रयोग किया गया है |इसमें श्रीराम का वर्णन एक आज्ञाकारी पुत्र , आदर्श भ्राता , आदर्श पीटीआई, आदर्श मित्र व् आदर्श राजा के रूप में किया गया है | यह पुस्तक अत्यन्त लोकप्रिय है |

यह एक अमरकृति है | यह पुस्तक साहित्य , दर्शन , राजनीति , धर्म और समाजशास्त्र सभी की दृष्टी से सर्वोत्तम है | इसमें मानव जीवन की सभी समस्याओ का समाधान किया गया है | इस पुस्तक में निहित इन सभी गुणों ने मुझे इस पुस्तक का नियोमीत पाठक बना दिया है | आज मै ही नही बल्कि सारा संसार इसका प्रशंसक (उपासक) है |

रामचरितमानस को सभी वर्ग के लोगो ने सम्मान दिया है | इसकी इन्ही आदर्श विशेषताओ के कारण मै इस ग्रंथ को अत्यधिक प्रेम करता हूँ |

January 28, 2017evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages2 CommentsHindi Essay, Hindi essays

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